My Joyful Wisdom

Chapter 9 / 25, 4 मिनट

तुम्हें इंसान नहीं, एहसास पकड़ता है

Attachment असल में किसी इंसान से नहीं होता — उस भावना से होता है जो उस इंसान के आस-पास तुम्हारे अंदर जागती है।

तुम्हें लगता है तुम किसी व्यक्ति से जुड़े हो। उसकी बातें, उसकी आदतें, उसकी मौजूदगी।

पर एक बात ग़ौर से देखो। जब वो इंसान सामने होता है, तो तुम्हारे अंदर एक ख़ास चीज़ जागती है — एक बेचैनी, एक खिंचाव, एक "कुछ होने वाला है" का एहसास। क्या वो एहसास सिर्फ़ उस इंसान का है? या वो एहसास पहले भी, कहीं और, किसी और के साथ हो चुका है?

ध्यान से देखोगे, तो कई बार वो एहसास एक-सा होता है। इंसान बदलते हैं — एहसास वही रहता है।

आगे पढ़ते रहो — ये free है

पहले दो chapters सबके लिए खुले हैं। बाक़ी सभी 25 पढ़ने के लिए Google या email से sign up करो — कोई password नहीं, कोई payment नहीं।

तुम्हारा email सिर्फ़ sign in के लिए use होता है। और कुछ नहीं।

शायद इसी पल कोई यहाँ पढ़ रहा है जिसकी job कल चली गई। या जिसे किसी अपने ने इतना तोड़ दिया कि उसे आगे कुछ नहीं दिखता। रात के दो बजे, जब वो किसी से कह नहीं पाता, ये library उसके लिए खुली रहती है।

ये इसलिए चल पाती है क्योंकि कोई और — जिसका दिन आज थोड़ा बेहतर है — चुपचाप उसका साथ दे देता है। तुम्हारा छोटा सा support किसी अजनबी तक अगली book पहुँचाता है, जिसे शायद उसी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

किसी का साथ दो अपना amount चुनो

अगर तुम ख़ुद अभी मुश्किल में हो, तो कुछ मत दो। बस पढ़ो। ये जगह तुम्हारे लिए ही बनी है।