Chapter 12 / 25, 4 मिनट
असली बदलाव सिर्फ़ एक जगह से आता है
बदलाव तब शुरू नहीं होता जब तुम्हें 'अच्छा लगे।' वो तब शुरू होता है जब तुम पुरानी प्रतिक्रिया को दोहराते नहीं — चाहे अंदर कुछ भी चल रहा हो।
तुम अपने आप से यह लाइन अक्सर कहते हो — "जब ready feel हो जाएगा, तब शुरू करूँगा।"
एक बात ग़ौर से देखो। क्या वो "ready" वाला दिन कभी आया? कभी-कभार थोड़ा सा — पर ज़्यादातर वो टलता ही गया।
यह तुम्हारी कमज़ोरी नहीं है। यह एक बहुत पुरानी चाल है मन की — "ready" का इंतज़ार करना, ताकि असल काम शुरू ही न हो।
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