Chapter 18 / 25, 4 मिनट
ख़तरे का सिग्नल या बस जाना-पहचाना एहसास?
हर असहज चीज़ ख़तरा नहीं होती। कुछ बस 'पहचान नहीं पा रहा' होती हैं — शरीर उसे ख़तरा समझ बैठता है, जबकि वो सिर्फ़ नई बात का संकेत है।
जब कुछ असहज महसूस होता है, दिमाग़ तुरंत एक फ़ैसला सुनाता है — "ख़तरा है।" दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है, मन दौड़ने लगता है, और तुम मान लेते हो कि कुछ ग़लत हो रहा है।
यहीं पर एक गड़बड़ होती है। क्योंकि दो चीज़ें अंदर एक जैसी महसूस होती हैं —
दोनों अलग हैं। पर शरीर में दोनों एक जैसे लगते हैं।
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