My Joyful Wisdom

Chapter 18 / 25, 4 मिनट

ख़तरे का सिग्नल या बस जाना-पहचाना एहसास?

हर असहज चीज़ ख़तरा नहीं होती। कुछ बस 'पहचान नहीं पा रहा' होती हैं — शरीर उसे ख़तरा समझ बैठता है, जबकि वो सिर्फ़ नई बात का संकेत है।

जब कुछ असहज महसूस होता है, दिमाग़ तुरंत एक फ़ैसला सुनाता है — "ख़तरा है।" दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है, मन दौड़ने लगता है, और तुम मान लेते हो कि कुछ ग़लत हो रहा है।

यहीं पर एक गड़बड़ होती है। क्योंकि दो चीज़ें अंदर एक जैसी महसूस होती हैं —

दोनों अलग हैं। पर शरीर में दोनों एक जैसे लगते हैं।

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शायद इसी पल कोई यहाँ पढ़ रहा है जिसकी job कल चली गई। या जिसे किसी अपने ने इतना तोड़ दिया कि उसे आगे कुछ नहीं दिखता। रात के दो बजे, जब वो किसी से कह नहीं पाता, ये library उसके लिए खुली रहती है।

ये इसलिए चल पाती है क्योंकि कोई और — जिसका दिन आज थोड़ा बेहतर है — चुपचाप उसका साथ दे देता है। तुम्हारा छोटा सा support किसी अजनबी तक अगली book पहुँचाता है, जिसे शायद उसी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

किसी का साथ दो अपना amount चुनो

अगर तुम ख़ुद अभी मुश्किल में हो, तो कुछ मत दो। बस पढ़ो। ये जगह तुम्हारे लिए ही बनी है।