My Joyful Wisdom

Chapter 5 / 25, 5 मिनट

दर्द जो कुछ देता भी है

अगर यह सब सिर्फ़ दर्द देता, तो तुम कब के बाहर निकल चुके होते। तुम इसमें इसलिए रुके हो क्योंकि यह चुपके से कुछ दे भी रहा है।

एक सख़्त-सी बात कहनी है। तैयार हो?

अगर यह पूरा चक्र सिर्फ़ दर्द देता, तो तुम्हारा मन इसे कब का छोड़ चुका होता। मन दर्द को सहन करने के लिए नहीं बना — वो तकलीफ़ से भागने के लिए बना है। फिर भी तुम यहाँ हो। चक्र चल रहा है।

इसका मतलब सीधा है — यह चक्र तुम्हें कुछ दे भी रहा है। कुछ ऐसा जो बाहर से नहीं दिखता। जब तक वो चीज़ दिख न जाए, "बदलाव" बस एक शब्द बना रहेगा।

आगे पढ़ते रहो — ये free है

पहले दो chapters सबके लिए खुले हैं। बाक़ी सभी 25 पढ़ने के लिए Google या email से sign up करो — कोई password नहीं, कोई payment नहीं।

तुम्हारा email सिर्फ़ sign in के लिए use होता है। और कुछ नहीं।

शायद इसी पल कोई यहाँ पढ़ रहा है जिसकी job कल चली गई। या जिसे किसी अपने ने इतना तोड़ दिया कि उसे आगे कुछ नहीं दिखता। रात के दो बजे, जब वो किसी से कह नहीं पाता, ये library उसके लिए खुली रहती है।

ये इसलिए चल पाती है क्योंकि कोई और — जिसका दिन आज थोड़ा बेहतर है — चुपचाप उसका साथ दे देता है। तुम्हारा छोटा सा support किसी अजनबी तक अगली book पहुँचाता है, जिसे शायद उसी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

किसी का साथ दो अपना amount चुनो

अगर तुम ख़ुद अभी मुश्किल में हो, तो कुछ मत दो। बस पढ़ो। ये जगह तुम्हारे लिए ही बनी है।